गुड़ी पा ड़वा चैत्र नवरात्रि डॉ. अंबालिका श्रीनिवास सेठिया सहायक प्राध्यापक वेदांग ज्योतिष विभाग भारतीय संस्कृति में गुड़ी पा ड़वा को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को विक्रम संवत के नए साल के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि से पौराणिक व ऐतिहासिक दोनों प्रकार की ही मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र प्रतिपदा से ही ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी तरह के उल्लेख अथर्ववेद और शतपथ ब्राह्मण में भी मिलते हैं। इसी दिन चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ होती हैं। फाल्गुन के जाने के बाद उल्लासित रूप से चैत्र मास का आगमन होता है। चैत्र ही एक ऐसा महीना है , जिसमें वृक्ष तथा लताएं फलते-फूलते हैं। शुक्ल प्रतिपदा का दिन चंद्रमा की कला का प्रथम दिवस माना जाता है। जीवन का मुख्य आधार वनस्पतियों को सोमरस चंद्रमा ही प्रदान करता है। इसे औषधियों और वनस्पतियों का राजा कहा गया है। इसीलिए इस दिन को वर्षारंभ माना जाता है। यह अवसर है नवसृजन के नवउत्साह का , पौराणिक मान्यताओं को समझने व धार्मिक उद्देश्यों ...