भारतीय कालगणना के विषय में...

भारतीय कालगणना

 ज्योतिषशास्त्र का प्रधान विषय निश्चित रूप से काल है इसलिए उसको काल विधायक शास्त्र भी कहा जाता है। जैसाकि वेदाङ्ग ज्योतिष में लगधमुनि ने 'कालज्ञानं प्रवक्ष्यामि लगधस्य महात्मना' इस प्रकार कहा भी है। अतएव ज्योतिषशास के प्रसङ्ग में 'काल' अति महत्त्वपूर्ण है। काल शब्द 'कल् संख्याने' सूत्रानुसार कल् धातु से निष्पत्र और गणना के अर्थ में व्यवहारार्ह माना गया है। इस काल के प्रसङ्ग को भारतीय वैदिक साहित्य व दर्शन में अनेक स्वरूपों में प्रतिपादित व विवेचित किया गया है। उसमें उसके दो स्वरूप स्पष्ट परिलक्षित होते है। एक सृष्टि सञ्चालक, पालक व संहारक के रूप में और दूसरा गणनात्मक या कलनात्मक रूप में। यहाँ उस काल के दूसरे स्वरूप के व्यावहारिक पक्ष की विशद चर्चा करना उद्देश्य है।


- Dr. Ambalika Sethiya, KKSU

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